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हमारी जीवनशैली और खान-पान से जुड़ी आदतें, सेहत पर बड़ा असर डालती हैं। रोज की दिनचर्या से जुड़ी कई बातों की हमारी जानकारी भी आधी-अधूरी ही होती है। विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल) के मौके पर जानते हैं, सेहत के लिए जरूरी कुछ आदतों के बारे में, बता रही हैं शमीम खान

स्वस्थ रहने के लिए हमें लगातार प्रयास करने पड़ते हैं। आनुवंशिक कारणों के अलावा हमारी गलत आदतें हमें बीमार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। अगर आप एक लंबी और स्वस्थ पारी खेलना चाहते हैं तो आपके लिए गलत आदतों को छोड़ना और कुछ अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी होगा।

पिएं गुनगुना पानी

सुबह सबसे पहले पानी पिएं। भले ही प्यास महसूस न हो रही हो। सुबह धीरे-धीरे जितना ज्यादा पानी पी सकते हैं, पिएं। इससे शरीर हाइड्रेट हो जाता है और टॉक्सिन्स भी फ्लश हो जाते हैं। महर्षि आयुर्वेद के अध्यक्ष, श्री आनंद श्रीवास्तव कहते हैं, 'आयुर्वेद के अनुसार सादे पानी को शरीर में अवशोषित होने में 6 घंटे लगते हैं, पर गर्म पानी को आधा समय लगता है। गुनगुना पानी दिन में तीन बार से अधिक न पिएं। सुबह खाली पेट, दोपहर में खाना खाने से पहले और रात में सोने से पहले गुनगुना पानी पिएं। यह एडिपोज ऊतकों (जमी वसा) को तोड़ने में मदद करता है।'

गुनगुनी धूप का मजा

सुबह धूप में बैठने के दो फायदे हैं। एक, सुबह-सुबह हवा में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। दूसरा, इस समय सूरज की किरणें तिरछी होती हैं, जिससे वे शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित हो जाती हैं। धूप में बैठे तो शरीरका 40 प्रतिशत हिस्सा खुलाहोनाहोना चाहिए, क्योंकि विटामिन-डी का निर्माण तभी होता है जब सूरज की किरणें त्वचा के सीधे संपर्क में आती हैं। इस दौरान सनस्क्रीन नलगाएं। सप्ताह में 3-4 बार 15-20 मिनट धूप में बिता लेंगे तो आपकी सप्ताह भर की विटामिन डी की जरूरत पूरी हो जाएगी। 

लगातार बैठे न रहना

गाजियाबाद के संजयनगर स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.संजय तेवतिया कहते हैं, '30 मिनट से अधिक बैठने से मेटाबॉलिज्म 90 प्रतिशत धीमा हो जाता है। एंजाइम्स जो बुरी वसा को धमनियों से मांसपेशियों तक लाते हैं, जहां ये बर्न हो सकती हैं, धीमे हो जाते हैं और शरीर के निचले भाग की मांसपेशियां मड़ जाती हैं। दो घंटों तक लगातार बैठे रहने से, अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। लगातार बैठे रहना टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोगों, कैंसर तथा समयपूर्व मृत्यु होने की आशंकाबढ़ा देता है। अगर आपहरआधे घंटे में केवल पांच मिनट का ब्रेक लें औरखड़े हो जाएं तो चीजें फिर से सामान्य होने लगती हैं।' घरहो या ऑफिस, नियमित अंतराल पर अपनी सीट से उठे और स्ट्रेच करें। फोन पर बात करते हुए या टीवी देखते समय खड़े हो जाएं। दोपहर में थोड़ा सा टहल लें। पैदल चलते हुए मीटिंग करें।

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में हुए शोध के अनुसार, जो लोगरोज 13 घंटे से अधिक बैठते हैं, उनमें मृत्यु का खतरा उन लोगों की तुलना में दो गुना हो जाता है, जो रोज 8-10 घंटे बैठते हैं। लगातार बैठे रहने से कमर के आसपास के हिस्से में वसा जमा होने लगती है।

दिन में दो बार ब्रश करना

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, वर्तमान में (2019 के आंकड़े) हमारे देश की 60 प्रतिशत वयस्क जनसंख्या और 70 प्रतिशत स्कूल जाने वाले बच्चों के दांत सड़ रहे हैं या उनमें कैविटी हो गई है।85 प्रतिशत जनसंख्या पीरियोडोंटल डिजीज (मसूड़ों से संबंधित एक रोग, जिसमें दांतों के आसपास के ऊतक संक्रमित हो जाते हैं) से प्रभावित हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह रात में ब्रश न करना है। हम सारा दिन जो खाते हैं, वह खाना हमारे दांतों में फंसा रहता है। जिससे दांतों परप्लाक जमने लगता है और दांतों का इनेमल निकल जाता है। इससे कैविटी हो जाती है। मसूड़ों की बीमारी जिंजिवाइटिस का खतरा भी बढ़ता है। यही वजह है कि जितना जरूरी सुबह ब्रश करना है, उतना ही जरूरी रात में ब्रश करना भी है।

अनुशासित जीवनशैली अपनाएं

अपनी जैविक घड़ी को दुरुस्त रखने के लिए जितना हो सके, अपने जीवन में संतुलन लाने का प्रयास करें। सप्ताह के सातों दिन एक ही समय खाना खाएं और सोएं। इस तरह का शेड्यूल बॉडी क्लॉक को ठीक रखने में सहायता करता है। जब भी अवसर मिले, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। धूम्रपान हमारी सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। इससे बचें। बर्मिघम यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार, अकेलेपन से रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर पड़ जाता है और इससे रोगों से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। लगातारस्क्रीन के सामने न बैठे रहें। सप्ताह में एक दिन गैजेट्स से पूरी तरह दूरी बना लें।


नींद न कम न ज्यादा 

डॉ. तेवतिया कहते हैं, 'अधिकतर वयस्कों के लिए पर्याप्त नींद 6-8 घंटे होती है, पर बहुत से लोगों के लिये यह 9-10 घंटे होती है। जो लोग नियमित 6-8 घंटे की नींद लेते हैं, उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। सोने-उठने और खाने का एक नियमित समय बनाना जरूरी है। एक बार जब कड़ाई से पालन करने लगेंगे, आपकी इंटरनल क्लॉक उसी अनुसार सेट हो जाएगी। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, स्वस्थ और तरोताजा रहने के लिए गहरी नींद जरूरी है, क्योंकि इस दौरान ही शरीर में उन हार्मोन्स का स्राव होता है, जो शरीर की खुद को रिपेयर करने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

रोज व्यायाम करना 

नॉर्वे की ओसलो यूनिवर्सिटी में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि स्वास्थ्य को सबसे बड़ा खतरा उम्र बढ़ने से नहीं है, बल्कि शारीरिक रूप से सक्रिय न होने से है। सप्ताह में कम से कम पांच दिन, तीस मिनट कोई भी पसंदीदा व्यायाम करें। नियमित टहलें, दौड़ लगाएं, तैराकी करें या साइकिल चलाएं। जब आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं तो न केवल शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है, बल्कि एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव भी बढ़ता है, जो तनाव को कम करने में मददगार होता है। दिनचर्या के अनुसार व्यायाम के लिए कोई भी वक्त चुन सकते हैं, हालांकि सुबह का वक्त अच्छा होता है क्योंकि ऑक्सीजन स्तर अच्छा रहता है।

एक साथ ज्यादा न खाएं 

स्वस्थ रहने के लिए खाने से अच्छी खुराक कोई नहीं है। हम जो खाते हैं, उसका सीधा प्रभाव हमारे शारीरिक और

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉ.बुद्धिराजा कहते हैं, 'दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बजाय छह बार मिनी मील खाएं। यानी एक समय में पेट भर खाने की बजाय, थोड़े-थोड़े अंतराल पर खाएं। इससे शरीर को ऊर्जा की आपूर्ति लगातार होती रहती है। पाचन तंत्र बेहतर काम कर पाता है। वजन कम करने के इच्छुकों को भी इसकी सलाह दी जाती है। पर, जरूरी है कि खाने में स्वस्थ विकल्पों का ही चुनाव करें। अन्यथा, ज्यादा खाए जाने की आशंका भी बढ़ सकती है। ध्यान रखें, शरीर भोजन को ठीक से पचाएगा, तभी आप उससे अधिकतम ऊर्जा और पोषण प्राप्त कर पाएंगे। मिनी मील्स लेने से रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है और मूड अच्छा रहता है।